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सपने या अपेक्षाएं

जीवन को बनाये रखने के लिए साँसों की आवश्कता होती है। दूसरी तरफ जीवन को चलाये रखने के लिए सपनों की। हमारे जीवन में सपनों की अपनी एक बहुत अहम जगह है। क्योंकि सिर्फ ओर सिर्फ हमें ही सपनें देखने और उनको पूरा करने की क्षमता प्रकृति ने हमें दी है। लेकिन कई बार सपनें देखने और उनको पूरा करने के बीच एक दीवार खड़ी मिलती है। वो दीवार होती है – अपेक्षाओं की। अपेक्षाएं खुदकी दूसरे से हो या दूसरों की हमसे, जब जरूरतों से ज्यादा हो जाती है तो वो बस एक दीवार का काम करती है।

Total Talk Series में हम चर्चा करेगें कि अपने जीवन के हर मोड़ पर आगे बढ़ने के लिए सपनें या अपेक्षाओं में से किसको चुना जाए। ताकि हमारा निर्णय(Decision) आगे चलकर हमारे लिए सही हो।

Life Mission

यूं ही मर जाना तो ठीक नही, जीते जी कुछ कर जाना होगा। कर्तव्य-पथ पर चलकर हमको, आश का दीपक जलाना होगा।

Aman kaushik

हम सभी बचपन में कई सारे सपनें देखते हैं। बड़े होकर हम बहुत बड़े आदमी बनेगें, लोगों की मदद करेगें, अपने देश की सेवा करेगें ओर भी न जानें कितना कुछ करने के सपनें देखते है। इनमें से बहुत ही कम सपने हकीकत बनते नज़र आते है।

इसका कारण क्या है? क्या हम उनको पूरा करने की मेहनत नही करते? या फिर कुछ और भी है जो इनको हकीकत बनने से रोकता है।

मेरी समझ में बहुत से लोग अपने सपनों को पूरा करने के लिए जरूरी मेहनत करने को भी तैयार रहते है और करते भी है। लेकिन जैसा हम सभी जानते है बीज बोते ही वह पेड़ नही बन जाता, उसको पेड़ बनता देखने के लिए धैर्य की जरूरत पड़ती है। उसी के जैसे सपनों को हकीकत बनाने में बहुत धैर्य की जरूरत होती है। इस धैर्य में वक़्त में हमसे जुड़े लोगों की अपेक्षाएं हमसे बड़ जाती है। क्योंकि उनसभी को वह सपना हकीकत बनते नजर नही आता जो हमे दिख रहा होता है। इस वजह से हमसे जुड़े लोगों की अपेक्षाओं ओर हमारे सपने के बीच तकरार होने लगती है। यहीं वो वक़्त होता है जब हमें अपेक्षाओं और निर्णय कैसे ले अपने सपनें में से किसी एक को चुनना है। यही वह चुनाव है जिस पर सपने की हकीकत निर्भर करती है।

कैसे करें चुनाव?

A man thinking about dreams and expectation

दूसरों की हमसे जो अपेक्षाएं है उनको पूरा करते जाए, या फिर अपने सपनें को हकीकत बनाने में जुट जाएं। इस बात पर निर्णय(Decision) लेना, इस बात पर निर्भर करता है कि हम अपने से जुड़े लोगों की बढ़ती अपेक्षाओं को पूरा करके उनको केवल अभी कुछ समय के लिए खुश करना चाहते है। या फिर अपने सपनों को पूरा करके अपना और उनका जीवन हमेशा के लिए सुखद बनाना चाहते है।

जो सपना पूरा करनें में आज हमें तकलीफ हो रही है, पर अगर हमें ये दिख रहा है कि वो आने वाले 5-10 सालों के बाद हमारी जिंदगी को बेहतर बना देगा। तो उसका चुनाव आज की करना हर कीमत पर बेहतर है।

अंत में कोई भी:का मूल्यांकन करने का सबसे आसान तरीका उस निर्णय(Decision) के 5-10 सालों में होने वाले असर को देख लेना है।

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